सोमवार, ५ एप्रिल, २०२१

सैमुएल मोर्स 2 एप्रिल स्मृतिदिन






 *_🎧आजचे शास्त्रज्ञ 🎧_*


*_सैमुएल मोर्स_*


*_📙मोर्स कोड का संशोधन📙_*


*_स्मृतिदिन - २ एप्रिल १८७२_*

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_मोर्सकोड, सन्देश भेजने की एक पद्धति है। इसकी रचना सैमुएल मोर्स ने १८४० के दशक के आरम्भिक वर्षों में वैद्युत टेलीग्राफ के माध्यम से सन्देश भेजने के लिये की थी। बाद में १८९० के दशक से मोर्स कोड का उपयोग रेडियो संचार के आरम्भिक दिनों में भी हुआ। मोर्स कोड के अन्तर्गत एक लघु संकेत तथा दूसरा दीर्घ संकेत प्रयोग किये जाते हैं। इन दो संकेतों के पूर्व निर्धारित मानकीकृत समन्वय से किसी भी संदेश को अभिव्यक्त किया जा सकता है। कागज आदि पर मोर्स कोड में कुछ लिखने के लिये लघु संकेत के लिये डॉट का प्रयोग तथा दीर्घ संकेत के लिये डैश का प्रयोग किया जाता है। किन्तु मोर्स कोड के लघु और दीर्घ संकेतों के लिये अन्य रूप भी प्रयुक्त हो सकते हैं; जैसे - ध्वनि, पल्स या प्रकाश संकेत आदि_


*_अन्तर्राष्ट्रीय मार्स कोड के पाँच अवयव हैं:_*

*१)* _लघु मार्क, डाट या डिट (·) - एक इकाई लम्बा_

*२)* _दीर्घ मार्क, डैश या डा (-) - तीन इकाई के तुल्य लम्बा_

*३)* _लघु एवं दीर्घ संकेतों के बीच रिक्त स्थान या समय - एक इकाई लम्बा_

*४)* _छोटा रिक्त स्थान (दो अक्षरों के बीच में) - तीन इकाई लम्बा_

*५)* _मध्यम रिक्ति (दो शब्दों के बीच में) - सात इकाई लम्बा_

     _मोर्सकोड, बाइनरीकोड (द्विककोड) से मिलता जुलता है किन्तु ध्यान से इसका विश्लेषण करनेसे पता चलेगा कि यह बाइनरी नहीं है क्योंकि लघु एवं दीर्घ संकेत के अलावा रिक्तस्थान भी छोड़ना पडता है।_

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*_संकलन : गजानन गोपेवाड

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*_सृष्टी विज्ञानगाथा विज्ञान व दिनविशेष मधून_*

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