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🇮🇳🇮🇳 *गाथा बलिदानाची* 🇮🇳🇮🇳
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*भाई रणधीर सिंह*
(क्रांतिकारी एवं सामाजिक सुधारक)
*जन्म : ७ जुलाई, १८७८*
(लुधियाना , पंजाब)
*मृत्यु : १६ अप्रैल १९६१*
(लुधियाना, पंजाब)
नागरिकता : भारतीय
पार्टी : कांग्रेस
विद्यालय : क्रिश्चियन कॉलेज
भाषा : पंजाबी
जेल : यात्रा १७ वर्ष
रचना : लेखनी और काव्य प्रतिभा
अन्य जानकारी : रणधीर सिंह सामाजिक सुधारों के प्रबल समर्थक थे।
रणधीर सिंह प्रसिद्ध सिक्ख नेता और क्रांतिकारी थे। वे अस्पृश्यता के विरोधी और महिलाओं के अधिकारों के पक्षधर थे।
💁♂️ *जन्म एवं परिचय*
रणधीर सिंह का जन्म ७जुलाई, १८७८ ई. में पंजाब के लुधियाना ज़िले में हुआ था। उन्होंने लाहौर के क्रिश्चियन कॉलेज में शिक्षा पाई। तत्कालीन प्रमुख सिख नेताओं से परिचय के बाद रणधीर सिंह 'सिंह सभा' आंदोलन में सम्मिलित हो गए। उनकी सशस्त लेखनी और काव्य प्रतिभा से इस आंदोलन को बड़ा बल मिला। रणधीर सिंह केवल पंजाबी भाषा में ही लिखते थे। अध्ययन के द्वारा उन्होंने सिख जीवन दर्शन का गहन ज्ञान प्राप्त किया। आजीविका के लिए रणधीर सिंह ने कुछ वर्ष तहसीलदार के रूप में काम किया और उसके बाद खालसा कॉलेज अमृतसर में अध्यापक बन गए।
🔮 *सामाजिक सुधारों के समर्थक*
रणधीर सिंह अस्पृश्यता के विरोधी और महिलाओं के अधिकारों के पक्षधर थे। रणधीर सिंह का कहना था कि "विद्यालयों के पाठ्यक्रम में धार्मिक शिक्षा का समावेश हो और उसे विदेशी प्रभाव से मुक्त रखा जाए।"
⚔️ *ब्रिटिश सरकार के विरोधी*
प्रथम विश्वयुद्ध (१९१४-१९१८) के समय ब्रिटिश सरकार ने रकाबगंज गुरुद्वारा की बाहरी दीवार गिरा देने का आदेश दिया तो भाई रणधीर सिंह के विचारों में एकदम परिवर्तन आया। वे ब्रिटिश विरोधी हो गए। भारतीय सेना को भी विद्रोह के लिए तैयार किया गया। १९१५ में रणधीर सिंह ने ब्रिटिश सत्ता को उखाड़ फेंकने का निश्चय किया।
⛓️⛓️ *आजीवन कारावास*
पर पहले ही भेद खुल जाने के कारण भाई रणधीर सिंह और उनके साथी गिरफ़्तार कर लिए गए। भाई को आजीवन कारावास की सजा मिली। १७ वर्ष जेल में रहकर जब वे बाहर आए, उस समय तक देश की राजनीतिक स्थिति बदल चुकी थी। रणधीर सिंह कांग्रेस की अहिंसक राजनीति का समर्थन नहीं कर सके और उसके आलोचक बने रहे।
🪔 *निधन*
१६ अप्रैल,१९६१ को रणधीर सिंह का देहांत हो गया।
🇮🇳🇮🇳🇮🇳 *जयहिंद* 🇮🇳🇮🇳🇮🇳
*🙏🙏🙏शुभ प्रभात🙏🙏🙏*
संकलन -)
गजानन गोपेवाड
उमरखेड जिल्हा- यवतमाळ ४४५२०६
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