🌳⛳ *सुप्रभात🌞वन्दे मातरम्*⛳🌳
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ज्येष्ठा मास,शुक्ल पक्ष, *द्वितीय*,आद्रा नक्षत्र,सूर्य उत्तरायण,ग्रीष्म ऋतु,युगाब्ध ५१२३,विक्रम संवत-२०७८,
शनिवार, १२ जून २०२१.
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*प्रभात दर्शन*
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*"त्रुटियां कोई हो, किसी की हो किन्तु दूसरों को दोष देना, हमारा स्वभाव है। हम गिरने पर पत्थर को, डूबने पर पानी को, जलने पर आग और कुछ न कर पाने की स्थिति में भाग्य को दोष देते हैं। दूसरों को दोष देने का अर्थ है कि स्वयं की त्रुटियों को स्वीकार करने की सामर्थ्य न होना और अपने में सुधार की भावी संभावनाओं को स्वयं अपने हाथों से नष्ट कर देना।*
*स्वयं के जीवन में दोष होने से भी ज्यादा घातक है, दूसरों को दोष देना। क्योंकि इसमें समय का अपव्यय व आत्मप्रवंचना दोनों होते हैं।"*
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*🚩🐅आपका दिन मंगलमय हो🐅🚩*
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