मंगळवार, ८ जून, २०२१

इंटरनेटचे जनक टिम बर्नर्स ली

 *📡📡📡टिम बर्नर्स ली📡📡📡*

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*इंटरनेटचे जनक*

*विश्व व्यापी वेब (www) चे अविष्कारक*

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*जन्म: ८ जून, १९५५*


सर टीम बर्नर्स ली (जन्म: ८ जून १९५५-हयात) हे जागतिक माहितीजालाचे जनक आहेत. य़ुरोपीयन नाभिकीय सन्शोधन संस्थेत (सर्न) असताना त्यानी २५ डिसेम्बर १९९० रोजी क्लायन्ट सर्वर संवादाचा (जागतिक माहितीजालाच्या सुरळीत कार्यासाठी आवश्यक असणारा घटक) प्रयोग यशस्वी करून दाखविला. ते सध्या वर्ल्ड वाईड वेब कोन्सोर्टियमचे निर्देशक आणि एम आय टी संगणकशास्त्र आणि कृत्रिम बुद्धीमत्ता प्रयोगशाळेत ३ कौम संस्थापक प्रमुख म्हणून कार्यरत आहेत.


टिम बरनर्स् ली का जन्म ८ जून, १९५५ को इंगलैंड में हुआ था। माता पिता दोनो गणितज्ञ थे। कहा जाता है कि उन्होने टिम को गणित हर जगह, यहां तक कि खाने की मेज पर भी बतायी।

टिम ने अपनी उच्च शिक्षा क्वीनस् कॉलेज, ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय से पूरी की। विश्वविद्यालय में उन्हें अपने मित्र के साथ हैकिंग करते हुऐ पकड़ लिया गया था। इसलिये उन्हें विश्वविद्यालय कंप्यूटर का प्रयोग करने से मना कर दिया गया। १९७६ में, उन्होने विश्विद्यालय से भौतिक शास्त्र में डिग्री प्राप्त की।

वेब तकनीक - अविष्कार

सर्न (en:CERN) यूरोपियन देशों की नाभकीय प्रयोगशाला है। टिम १९८४ से वहीं फेलो के रूप में काम करने लग गये। वहां हर तरह के कंप्यूटर थे जिन पर अलग अलग के फॉरमैट पर सूचना रखी जाती थी। टिम का मुख्य काम था कि वे सूचनाये एक कंप्यूटर से दूसरे पर आसानी से जा सकें। उन्हे लगा कि क्या कोई तरीका हो सकता है कि इन सब सुचनाओं को इस तरह से पिरोया जाय कि ऐसा लगे कि वे एक जगह ही हैं। बस इसी का हल सोचते सोचते, उन्होने वेब तकनीक का अविष्कार किया और दुनिया का पहला वेब पेज ६ अगस्त १९९१ को सर्न में बना। निहःसन्देह यह तकनीक, २१ वीं शताब्दी की सबसे लोकप्रिय संपर्क साधन है।

टिम ने इस तकनीक का आविष्कार किया जब वे सर्न में काम कर रहे थे और यह सर्न की बौद्घिक संपदा थी। ३० अप्रैल १९९३ को, टिम के कहने पर सर्न ने इस तकनीक को मुक्त कर दिया। अब इसे दुनिया के लिए न केवल मुफ्त, पर मुक्त रूप से उपलब्ध है। इसके लिए किसी को, कोई भी फीस नहीं देनी पड़ती है। यह निर्णय न केवल महत्वपूर्ण था पर इंटरनेट के शुरवाती दौर के निर्णयो के अनुरूप था जो हर तकनीक को मुफ्त व मुक्त रूप से उपलब्ध कराने के लिये कटिबद्ध थे।

टिम, बाद में अमेरिका चले गये। १९९४ में उन्होने, मैसाचुसेटस् इंस्टिट्युट ऑफ टेकनॉलोजी में विश्व व्यापी वेब संघ (W3C) की स्थापना की। यह वेब के मानकीकरण में कार्यरत है।

सम्मान

टिम बरनर्स् ली को, २००१ में, रॉयल सोसायटी का सदस्य बनाया गया। २००४ में नाईटहुड की उपाधि दी गयी थी। १३ जून २००७ को, ऑर्डर ऑफ मेरिट, इंगलैंड के सबसे महत्वपूर्ण सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान महारानी द्वारा कला, विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिये दिया जाता है। इसी लिये टाइम पत्रिका ने उन्हें, २० वीं शताब्दी के १०० महान वैज्ञानिकों और विचारकों में चुना है।


संकलन -)गजानन गोपेवाड

उमरखेड जिल्हा- यवतमाळ ४४५२०६

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