🌳⛳ *सुप्रभात🌞वन्दे मातरम्*⛳🌳
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श्रावण मास,कृष्ण पक्ष, *द्वादशी*,पुष्य नक्षत्र,सूर्य दक्षिणायन,वर्षा ऋतु,युगाब्ध ५१२३,विक्रम संवत-२०७८,
शनिवार, ०४ सप्टेंबर २०२१.
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*प्रभात दर्शन*
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*"मनुष्य के लिए सुख और आनंद का भंडार भीतर ही है। उसकी झलक बाहर भी दिखाई देती है, पर वह केवल झलक ही है। शास्त्र का कथन ठीक ही है कि यदि सत्य वस्तु, ब्रह्म या परमात्मा का रूप जानना हो, तो हमें अपने चित्त को क्षण भर के लिए स्थिर बनाना पड़ेगा। इसे साधना-धर्म का अंग कहते हैं। इसलिए स्थायी सुख-प्राप्ति के लिए हमें धर्म का आश्रय लेना पड़ेगा। धर्म ही हमें वर्तमान मुहूर्त के क्षणिक सुख के बदले भविष्य में होने वाले अक्षय सुख का मार्ग बताता है। "*
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*🚩🐅आपका दिन मंगलमय हो🐅🚩*
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