*ईद *का दुसरा नाम ही इंसानियत है! मुस्कुराहट और दुआंए यही *अल्लाह* की मर्जी होती है! हमारे *कर्म * हमारी सही पहचान है! और मै तहेदिलसे ये मानती हूं * जो लोग दुसरों को अपनी दुआओं मे शामिल करते है ,खुशियां सबसे पहले उनके दरवाजे पर दस्तक देती है! *ईद! सही मायनोमे सबको एकसाथ जोड़कर रखती है!* हम सब मिलकर इंसानियत बरकरार रख पाये तो एक दिन जरूर*अल्लाह की चेहरे पर की मुस्कुराहट अपने कर्म से वापस ला सके तो उस दिन हर दिल मे *ईद!* मनायी जायेगी! हम सबकी दुआंए बेहतरीन वक्त पर जरूर रंग लाएगी ! *खुद और खुदा! देखा जाये तो एक लकीर का अंतर है!हमारे कर्मोंसे यह हम एक बना सकते है!* अकेले हम बूॅंद है,मिल जाये तो सागर है!अकेले हम धागा है,मिल जाये तो चादर है!अकेले हम कागज है,मिल जाये तो किताब है!अकेले हम अल्फाज है ,मिल जाये तो जवाब है!अकेले हम पत्थर है,मिल जाये तो इमारत है! अकेले हम दुआ है,मिल जाये तो इबादत है!* मुस्कुराहट और दुआओं के साथ आप सबको *ईद मुबारक!*
गजानन गोपेवाड

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