🌳⛳ *सुप्रभात🌞वन्दे मातरम्*⛳🌳
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आषाढ मास,कृष्ण पक्ष, *चतुर्थी*,शतभिषा नक्षत्र,सूर्य दक्षिणायन,वर्षा ऋतु,युगाब्ध ५१२३,विक्रम संवत-२०७८,
मंगलवार, २७ जुलै २०२१.
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*प्रभात दर्शन*
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पुनर्वित्तं पुनर्मित्रं
पुनर्भार्या पुनर्मही।
एतत्सर्वं पुनर्लभ्यं
न शरीरं पुनः पुनः॥
*भावार्थ :— धन, संपति, मित्र, स्त्री बार-बार मिल सकते हैं; लेकिन मनुष्य-शरीर केवल एक ही बार प्राप्त होता है। एक बार नष्ट हो जाने के बाद पुनः प्राप्त करना असंभव है। इसीलिए इस मानव-देह को अधिकाधिक राष्ट्र व मानव कल्याण में लगाना ही मानव-देह की सार्थकता है।*
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*🚩🐅आपका दिन मंगलमय हो🐅🚩*
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