सोमवार, १० जानेवारी, २०२२

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             *गाथा बलिदानाची*

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            *तिरुपुर कुमारन*

          (भारतीय क्रांतिकारी)


   जन्म : ४ अक्टूबर १९०४

(चेनिमलाई,ईरोड,मद्रास प्रेसिडेंसी,ब्रिटिश इंडिया)


 *मृत्यु : ११ जनवरी १९३२* 

                  (उम्र २७)


(तिरुपुर,मद्रास प्रेसिडेंसी,ब्रिटिश इंडिया)


मृत्यु का कारण : सत्याग्रह के दौरान पुलिस की क्रूरता

राष्ट्रीयता : भारतीय


कुमारन को तिरुपुर कुमारन भी कहा जाता है! एक भारतीय क्रांतिकारी थे जिन्हों ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था।


भारत को अंग्रेजों से स्वतंत्र कराने की जंग में कइयों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। किसी का लहू बहा तो कोई सालों तक जेल में बंद रहा। अंग्रेजों की यातनाएं सही, लेकिन देश के वे वीर जांबाज पीछे नहीं हटे और अपनी अंतिम सांस तक देश की आजादी के लिए लड़ते रहे।


इन्ही जांबाजों में से एक नाम है तिरुपुर कुमारन, एक ऐसा नाम जो अंग्रेजी हुकूमत की लाठी के आगे नहीं टूटा और सीना फख्र से चौड़ा कर अपने देश को स्वंतंत्र कराने की लड़ाई में कूद पड़ा।


कुमारन ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग ले अपना संपूर्ण जीवन भारत को आजाद कराने में लगा दिया, इसके बावजूद भारत के इस महान स्वतंत्रता सेनानी का नाम इतिहास के पन्नों में कहीं गुम हो गया।


कुमारन ने यह जानते हुए कि उस समय ब्रिटिश सरकार के भारत में तिरंगा के फहराने पर पूरी तरह से मनाही है, राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को लहराने पर जोर दिया था।


वह तिरुपुर के रहने वाले थे और तिरुपुर में एक शांतिपूर्ण असहयोग आन्दोलन के दौरान ब्रिटिश पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसी आंदोलन में घायल हुए कुमारन ने अपना दम तोड़ दिया।

अपने वतन की आजादी के लिए इस शख्स ने अंग्रेजों की कई लाठियां खाई, लेकिन अपनी मातृभूमि को आजाद कराने के उद्देश्य पर वह दृढ़ हो डटे रहे।


कुमारन का जन्म भारत मद्रास प्रेसिडेंसी, चेन्नई (तमिलनाडु में वर्तमान ईरोड जिला) में चेननिमालाई में हुआ था। उन्होंने देश बंधु युवा संघ की स्थापना की और अंग्रेजों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। ११ जनवरी १९३२ को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ एक विरोध मार्च के दौरान तिरुपुर में नौय्याल नदी के तट पर पुलिस हमले से बने चोटों से उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु के समय, वह भारतीय राष्ट्रवादियों का ध्वज पकड़ रहे थे, जो कि अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित कोडी कथथा कुमारन (कुमारन ने ध्वज की रक्षा की) को उकसाया। 


अक्टूबर २००४ में भारत की १०० वीं जयंती पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया गया था।  तिरुपुर में उनके सम्मान में एक मूर्ति बनाई गई है जिसे अक्सर सार्वजनिक प्रदर्शनों के लिए एक केंद्र बिंदु के रूप में उपयोग किया जाता है।

🇮🇳🇮🇳🇮🇳 *जयहिंद*🇮🇳🇮🇳🇮🇳

🙏🙏🙏शुभ प्रभात🙏🙏🙏

संकलन -)गजानन गोपेवाड 

उमरखेड जिल्हा- यवतमाळ ४४५२०६

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