शुक्रवार, ४ मार्च, २०२२

गाथा बलिदानाची* ➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿ 🇮🇳🇮🇳🇮🇳 *गिता मुखर्जी

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               *गाथा बलिदानाची*

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🇮🇳🇮🇳🇮🇳 *गिता मुखर्जी*🇮🇳🇮🇳🇮🇳


*(नारी शक्ति : पश्चिम बंगाल से लगातार सात बार सांसद चुनी गईं गीता मुखर्जी)*


       *जन्म : ८ जनवरी १९२४*

        (दक्षिण कलकत्ता, बंगाल     

       प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत)


       *मृत्यु : ४ मार्च २०००*

                 (उम्र ७६)

          (नई दिल्ली, भारत)


जन्म का नाम : गीता रॉय चौधरी

राष्ट्रीयता : भारतीय

राजनीतिक दल : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी

जीवन संगी : विश्वनाथ मुखर्जी

शैक्षिक सम्बद्धता : कलकत्ता युनिवर्सिटी असुतोश कॉलेज

पेशा : राजनीतिज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक

धर्म : हिन्दू


           गीता मुखर्जी वामपंथी आंदोलन और नारी सशक्तिकरण का सशक्त चेहरा थीं। पश्चिम बंगाल से लगातार सात बार लोकसभा में पहुंचने वाली गीता मुखर्जी लोकसभा की दमदार आवाज थीं। वे १९८० में पहली बार बंगाल के पनसुकरा से भाकपा के टिकट पर लोकसभा की सदस्य चुनीं गईं। आंदोलनकारी सांसद होने के साथ ही गीता मुखर्जी गहरी साहित्यिक अभिरुचि वाली महिला थीं।


👸🏻 *पनसुकरा में अपराजेय रहीं*


 गीता मुखर्जी ने १९८४, १९८९, १९९१, १९९६, १९९८ और १९९९ का लोकसभा चुनाव मिदनापुर जिले की पनसुकरा लोकसभा क्षेत्र से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के टिकट पर जीता। इससे पहले वे विधानसभा की सदस्य रह चुकी थीं। वे पहली बार १९६७ में पनसुकरा पूर्व से विधायक चुनीं गई। फिर १९७२ में भी पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए चुनीं गईं।



⛓ *स्वतंत्रता आंदोलन में जेल गईं*


 गीता मुखर्जी का जन्म ८ जनवरी १९२४ को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने बांग्ला साहित्य में स्नातक की पढ़ाई आशुतोष कॉलेज कोलकाता से की। १९४२ में उनका विवाह वामपंथी नेता विश्वनाथ मुखर्जी के संग हुआ। वे स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान और उसके बाद भी कई बार जेल गईं।


⚛ *१५ साल की उम्र में छात्र राजनीति में*


 गीता महज १५ साल की उम्र में आशुतोष कॉलेज कोलकाता में अध्ययन के दौरान भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के छात्र संगठन आल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन में सक्रिय हो गईं थी। वे बंगाल प्रांत छात्र संगठन की १९४७ से १९५१ तक सचिव रहीं। वे १९४६ में सीपीआई की राज्य समिति की सदस्य बन गई थीं। १९८१ के बाद वे लगातार सीपीआई की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य रहीं।


✍ *कई पुस्तकें लिखी*


गीता मुखर्जी की साहित्य में काफी रूचि थी। उन्होंने बांग्ला में भारत उपकथा, छोटोदेर रविंद्रनाथ और हे अतिथि कथा कहो जैसी पुस्तकों की रचना की। उन्होंने कुछ पुस्तकों का अंग्रेजी से बांग्ला में अनुवाद भी किया। गीता मुखर्जी अपने जीवन के आखिरी क्षण तक संसद के अंदर और बाहर सक्रिय रहीं। सन २००० में ४ मार्च को ७६ साल की उम्र में जब वे एक कार्यक्रम में अलीगढ़ जाने की तैयारी कर रही थीं, उनका नई दिल्ली में निधन हो गया।


🙋‍♀ *संसद में महिला आरक्षण की हिमायत*


महिलाओं को संसद और राज्य के विधानसभाओं में ३३ फीसदी आरक्षण दिए जाने वाले विधेयक के लिए वे सक्रियता से हिमायत करती रहीं। इस बिल के लिए बनी संयुक्त संसदीय समिति की वे चेयरपर्सन थीं। इस बिल को लेकर उनका समर्पण इतना ज्यादा था कि ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने गुजराल सरकार में मंत्री पद सिर्फ इसीलिए ठुकरा दिया कि वह बिल पर पूरा फोकस करना चाहती थीं।


🌀 *सफरनामा*


१९२४ में ८ जनवरी को उनका जन्म हुआ।

१९६७ में पहली बार विधानसभा का चुनाव जीता।

१९८० में बंगाल के पनसुकरा से लोकसभा का चुनाव जीता।

१९९९ में सातवीं बार पनसुकरा से लोकसभा का चुनाव जीता। २००० में ४ मार्च को नई दिल्ली में निधन हो गया।

🇮🇳🇮🇳🇮🇳 *जयहिंद* 🇮🇳🇮🇳🇮🇳

🙏🙏🙏शुभ प्रभात🙏🙏🙏

संकलन -)गजानन गोपेवाड 

उमरखेड जिल्हा- यवतमाळ ४४५२०६

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