बुधवार, २३ जून, २०२१

निसर्ग सौंदर्य जपण्यासाठी एक प्रयत्न केला

















































 

Mirg insects


 










काय रे मेघराजा कवी गजानन गोपेवाड

 *काय रे मेघराजा*

           


*काय रे मेघराजा,*

*असं शोभतं का तूला...*

*नेत्यासारखच तू पण,*

*राजकारणीच झाला....*


उमेदवारा सारखा तू पण,

लई जोशातच आलास...

तीनचार दिवस प्रचाराचा,

पाऊस पाडून गेलास....


गडगडाटाच भाषण ऐकून,

भोळा शेतकरी सुखावला....

तुझ्या आश्वासनात येऊन,

भुमित मतदान करुन गेला..


नेत्यासारखच तुझंही,

जल्लोषात स्वागत झालं...

इतका कोसळलास की,

तुला मोह आवरता नाही आलं...


विहीर ,बंधारे फोडून,

नदी, नाल्याला पूर आला...

कुठे बियाणे दडपून,

तर कुठे खरडूनच नेला...


 मतदारा सारखीच

शेतकऱ्याची गत झाली..

मातीत जीव ओतूनही,

दूबार पेरणीची वेळ आली...


धरणीच पोट फाडून,

अंकुर हिम्मतीने वर आले...

आईच्या दुधा विना,

बळ मिळेल का रे त्याले...


जगवायचच झालं तर,

वरपाण्यावरही जगतं...

बाळ सध्दृढ होण्यासाठी,

आईचच दूध लागतं...


उद्योग, व्यापाऱ्याच्या मदतीने,

हे सरकार चालतही असंल...

पण अंगात बळ कुठून येईल

जर जगाचा पोशिंदाच नसंल...


*ढगाळ आश्वासने देऊन,*

*सांगना कुठे रे गेलास...*

*काय रे मेघराजा'', तू पण*

*राजकारणी झालास........

मामाच पत्र कविता गजानन गोपेवाड

 *●काहीतरी संपलय●*


मामाचं पत्र हरवलंय की 

पत्र लिहिणारा मामाचं हरवलाय ?

एक काहीतरी नक्कीच हरवलंय !


कोंबड्याचं आरवणं थांबलंय की 

ती सकाळ व्हायचीच थांबलीय ?

एक काहीतरी नक्कीच थांबलय !


पाटीवर अभ्यास लिहायचा राहिलाय 

की आमची पाटी कोरीच राहिलीय ?

एक काहीतरी नक्कीच राहिलंय !


मऊ वरण-भात करपलंय 

की आमची जीभच करपलीय ?

एक काहीतरी नक्कीच करपलय !


संवाद कमी झालाय 

की विसंवाद वाढलाय ?

एक काहीतरी नक्कीच झालंय


आमचं वय वाढलंय 

की आमच्यातलं अंतर वाढलंय ?

एक काहीतरी नक्कीच वाढलंय


शुभं करोति म्हणायचं विसरलोय 

की शुभ म्हणजे काय तेच विसरलोय ?

एक काहीतरी नक्कीच विसरलोय !


रामाची गोष्ट संपली आहे 

की प्रत्येक गोष्टीतला रामच संपलाय ?


एक काहीतरी नक्कीच संपलय..!!🎻

लक्षणराव किर्लोस्कर

 *लक्ष्मणराव काशिनाथ किर्लोस्कर*

🚜🛺🚜🛺🚜🛺🚜🛺🚜🛺🚜

*किर्लोस्कर उद्योग समूहाचे संस्थापक*

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*जन्म - २० जून  इ.स. १८६९*


लक्ष्मणराव काशिनाथ किर्लोस्कर (लकाकि) 

 २० जून, इ.स. १८६९ 

 २६ सप्टेंबर, इ.स. १९५६

    हे मराठी,हे भारतीय उद्योजक होते.ते किर्लोस्कर उद्योग समूहाचे संस्थापक होते.इ.स. १८८८ साली त्यांनी बेळगावात सायकल दुरुस्तीचे दुकान थाटत व्यावसायिक क्षेत्रात आपले पहिले पाऊल टाकले.शेतीसाठी त्यांनी बनवलेले लोखंडी नांगर हे पुढे विस्तारलेल्या किर्लोस्कर समूहाचे पहिले उत्पादन होते. किर्लोस्करवाडी येथे त्यांनी इ.स. १९१० साली कारखाना काढला; तसेच कारखान्यातील कर्मचाऱ्यांसाठी औद्योगिक वसाहत स्थापली.किर्लोस्कर समूहाची धुरा त्यांच्यानंतर त्यांचे पुत्र शंतनुराव किर्लोस्कर यांनी सांभाळली.


🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

संकलन -)

गजानन गोपेवाड 

उमरखेड जिल्हा- यवतमाळ ४४५२०६

ब्लेझ पास्काल

 *📐📐📐ब्लेझ पास्काल📐📐📐*

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*फ्रेंच गणितज्ञ, भौतिकशास्त्रज्ञ, संशोधक, लेखक*

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*जन्मदिन - १९ जून  इ.स. १६२३*


ब्लेझ पास्काल (देवनागरी लेखनभेद: ब्लेस पास्कल; फ्रेंच: Blaise Pascal ; 

  *१९ जून इ.स. १६२३* 

 *१९ ऑगस्ट इ.स. १६६२*

  हा फ्रेंच गणितज्ञ,भौतिकशास्त्रज्ञ,संशोधक,लेखक व होता.त्याने आरंभीच्या काळात मूलभूत व उपयोजित विज्ञानात, विशेषकरूनद्रव पदार्थांच्या भौतिक गुणधर्मांबद्दल महत्त्वपूर्ण संशोधन केले. एवांगेलिस्ता तॉरिचेल्ली याने दाब व निर्वाताविषयी पहिल्यांदा प्रतिपदलेल्या संकल्पनांचे स्पष्टीकरण पास्कालाने मांडले. त्यांच्या अलौकिक बुद्धिमत्तेमुळे आधुनिक विचारवंतांमधील त्यांचे स्थान अनन्यसाधारण गणले जाते. त्यांचा जन्म क्लेरमाँ-फेराँ येथे झाला. १६२६ मध्ये त्यांची आई मृत्यू पावली व १६३१ मध्ये पास्काल कुटुंबाने पॅरिसला प्रयाण केले.

ब्लेझ पास्कालचे वडील उत्तम गणितज्ञ होते आणि त्यांच्या मार्गदर्शनाखालीच पास्कार अभ्यास न करता प्रथम लॅटिन व ग्रीक भाषांवर प्रभुत्व मिळवावे अशी त्यांच्या वडिलांची इच्छा होती. तथापि वयाच्या बाराव्या वर्षीच त्यांनी भूमितीच्या अभ्यासास सुरुवात केली व चौदाव्या वर्षापासून ते वडिलांसह रोबेर्व्हाल, मेर्सेन इ. भूमितिविज्ञांच्या साप्ताहिक बैठकींना हजर राहू लागले. १६३९ मध्येच त्यांनी ‘शांकवामध्ये [⇨ शंकुच्छेद] अंतर्लिखित केलेल्या षट्कोनाच्या विरुद्ध बाजूंच्या जोड्यांचे छेदबिंदू एकरेषीय असतात’ हे आता त्यांच्यात नावाने ओळखण्यात येणारे व प्रक्षेपय भूमितीत [⇨ भूमिति] महत्त्वाचे म्हणून मानण्यात येणारे प्रमेय मांडले. १६४० साली पास्कार कुटुंब या भूमितिविज्ञांच्या Brouillon project या ग्रंथाच्या आधारे शांकवांवरील निबंधांचा एक ग्रंथ (Essai pour les coniques) लिहून पूर्ण केला. या असामान्य ग्रंथामुळे त्यांना लहान वयातच पुष्कळ प्रसिद्धी लाभली व देकार्तसारख्या गणितज्ञांना सुद्धा त्यांचा हेवा वाटला.

वडिलांच्या हिशेबाच्या कामात मदत करण्याच्या उद्देशाने पास्कार यांनी बेरीज व वजाबकी करणारे एक यंत्र तयार करण्याची योजना १६४२ मध्ये आखली; हे यंत्र तयार करण्याचा व त्याचे वितरण करण्याचा एकाधिकार त्यांना १६४९ मध्ये प्राप्त झाला, तथापि ते महाग व क्लिष्ट असल्याने त्याचा फारसा प्रसार होऊ शकला नाही.                      

*🙏🙏🙏शुभ प्रभात🙏🙏🙏*

संकलन -)गजानन गोपेवाड 

उमरखेड जिल्हा- यवतमाळ ४४५२०६

प्रभात दर्शन

 🌳⛳ *सुप्रभात🌞वन्दे मातरम्*⛳🌳

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ज्येष्ठा मास,शुक्ल पक्ष, *नवमी*,हस्त नक्षत्र,सूर्य उत्तरायण,ग्रीष्म ऋतु,युगाब्ध ५१२३,विक्रम संवत-२०७८, 

शनिवार, १९ जून २०२१.

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                        *प्रभात दर्शन*

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प्रियो भवति दानेन 

               प्रियवादेन चापरः,

मन्त्रं मूल बलेनान्यो 

              यः प्रियः प्रिय एव सः।


*भावार्थ - कुछ लोग उपहार देने पर प्रिय बनते हैं जबकि कुछ मनोहर बातों से, कुछ अन्य मन्त्रबल से प्रिय बनते हैं, पर जिन्हें आप प्रिय हैं, वो आपके प्रिय ही हैं (बिना कुछ किये ही)।*

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*🚩🐅आपका दिन मंगलमय हो🐅🚩*

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गाथा बलिदानाची

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🇮🇳🇮🇳 *गाथा बलिदानाची* 🇮🇳🇮🇳

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            *दादा धर्माधिकारी*       

     *(शंकर त्रिम्बक धर्माधिकारी)* 

     (स्वंतन्त्रता सेनानी तथा लेखक)

        *जन्म : १८ जून १८९९*

          (बैतूल ज़िला,मध्य प्रदेश)

       *मृत्यु : १ दिसम्बर १९८५*

नागरिकता : भारतीय

प्रसिद्धि : स्वतन्त्रता सेनानी तथा लेखक

धर्म : हिन्दू

जेल यात्रा : 'भारत छोड़ो आन्दोलन' के दौरान इन्हें गिरफ़्तार किया गया था।

संबंधित लेख : महात्मा गाँधी, असहयोग आन्दोलन, भारत छोड़ो आन्दोलन

विशेष : दादा धर्माधिकारी को हिन्दी, संस्कृत, मराठी, बंगला, गुजराती और अंग्रेज़ी भाषाओं का अच्छा ज्ञान था।

कृतियाँ : 'अहिंसक क्रांति की प्रक्रिया', 'क्रांतिशोधक', 'गांधीजी की दृष्टी अगला कदम', 'युवा और क्रांति', 'समग्र सर्वोदय दर्शन' आदि।

अन्य जानकारी : दादा धर्माधिकारी 'गांधी सेवा संघ' के सक्रिय कार्यकर्ता थे। 'भारत छोड़ो आन्दोलन' की गिरफ्तारी से छूटने पर वे मध्य प्रदेश असेम्बली के सदस्य और संविधान परिषद के सदस्य चुने गए थे।

                           शंकर त्रिम्बक धर्माधिकारी  भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, लेखक और गाँधीवादी चिंतक थे। ये 'गाँधी सेवा संघ' के सक्रिय कार्यकर्ताओं में से एक थे। आप 'दादा धर्माधिकारी' के नाम से अधिक जाने जाते थे। दादा धर्माधिकारी ने अपना अधिकांश समय दलितों और महिलाओं के उत्थान में लगाया। हिन्दी, संस्कृत, मराठी, बंगला, गुजराती और अंग्रेज़ी भाषाओं का इन्हें अच्छा ज्ञान था। एक लेखक के रूप में इनकी दो दर्जन से भी अधिक पुस्तकें प्रकाशित हुई थीं।


💁🏻‍♂️ *जन्म तथा शिक्षा*

दादा धर्माधिकारी का जन्म १८ जून,१८९९ को मध्य प्रदेश के बैतूल ज़िले में हुआ था। जब वे नागपुर में शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, उसी समय महात्मा गाँधी ने 'असहयोग आन्दोलन' प्रारम्भ कर दिया। इस समय दादा धर्माधिकारी ने शिक्षा छोड़ दी और विद्यालय त्याग दिया। उन्होंने औपचारिक शिक्षा की कोई डिग्री नहीं ली थी, किन्तु स्वाध्याय से ही अपने समय के विचारको में महत्वपूर्ण स्थान बना लिया था।


☣️ *विभिन्न भाषाओं के ज्ञाता*

                        दादा धर्माधिकारी हिन्दी, मराठी, गुजराती, बंगला, संस्कृत और अंग्रेज़ी भाषाओ के अच्छे ज्ञाता थे।                                                        💥 *क्रांतिकारी गतिविधियाँ*

                        दादा धर्माधिकारी ने 'तिलक विद्यालय', नागपुर में शिक्षक के रूप में कार्य आरंभ किया। वे स्वतंत्रता संग्राम में भी सक्रिय भाग लेते रहे। १९३५ से वे वर्धा में जाकर रहने लगे। 'गांधी सेवा संघ' के वे सक्रिय कार्यकर्ता थे। दादा धर्माधिकारी का प्रमुख नेताओं से निकट का संपर्क था। 'भारत छोड़ो आन्दोलन' की गिरफ्तारी से छूटने पर वे मध्य प्रदेश असेम्बली के सदस्य और संविधान परिषद के सदस्य चुने गए थे। आचार्य विनोबा भावे के 'भूदान आन्दोलन' में भी उन्होंने आगे बढ़कर भाग लिया।


🔹 *दलितों का उत्थान*

दादा धर्माधिकारी ने अपने जीवन का लंबा समय दलितों और महिलाओं के उत्थान में लगाया। दादा वैचारिक क्रांति के पक्षधर थे। उनकी मान्यता थी कि समाज में परिवर्तन के लिए लोगों के विचारों में परिवर्तन आवश्यक है।


📚 ✍️ *कृतियाँ*

एक लेखक के रूप में भी दादा धर्माधिकारी ने अच्छा नाम कमाया था। हिन्दी, मराठी और गुजराती में उनकी दो दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हुई थीं। उनकी कुछ कृतियाँ इस प्रकार हैं-


अहिंसक क्रांति की प्रक्रिया (हिन्दी)

आपल्या गणराज्याची घडण (मराठी)

क्रांतिशोधक (हिन्दी)

गांधीजी की दृष्टी (हिन्दी)

गांधीजी की दृष्टी अगला कदम (हिन्दी, जर्मन)

नये युग की नारी (हिन्दी)

नागरिक विश्वविद्यालय - एक परिकल्पना (मराठी)

प्रिय मुली (मराठी)

मानवनिष्ठ भारतीयता (हिन्दी, मराठी)

मैत्री (मराठी)

युवा और क्रांति (मराठीत, क्रांतिवादी तरुणांनो)

लोकतंत्र विकास और भविष्य (मराठीत, लोकशाही विकास आणि भविष्य)

समग्र सर्वोदय दर्शन (मराठीत, सर्वोदय दर्शन)

निधन

🪔 *निधन*                                                                 दादा धर्माधिकारी का निधन १ दिसम्बर,१९८५ को हुआ। 

🇮🇳🇮🇳🇮🇳 *जयहिंद* 🇮🇳🇮🇳🇮🇳

*🙏🙏विनम्र अभिवादन🙏🙏🙏*

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संकलन -)गजानन गोपेवाड राज्य समन्वयक महाराष्ट्र 

उमरखेड जिल्हा- यवतमाळ ४४५२०६

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