🌳⛳ *शुभ प्रभात🌞वन्दे मातरम्*⛳🌳
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चैत्र मास,शुक्ल पक्ष,*षष्ठी*,मृगशिरा नक्षत्र,सूर्य उत्तरायण,बसन्त ऋतु,युगाब्द ५१२४,विक्रम संवत-२०७९,
गुरुवार, ०७ एप्रिल २०२२.
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*प्रभात दर्शन*
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नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य
न चायुक्तस्य भावना,
न चाभावयत: शांतिर
शांतस्य कुत: सुखम्।
*भावार्थ - जिस मनुष्य का मन इंद्रियों अर्थात् धन, लोभ, आलस्य आदि में लिप्त है, उसके मन में भावना (आत्मज्ञान) नहीं होती, और जिस मनुष्य के मन में भावना नहीं होती, उसे किसी भी प्रकार से शान्ति नहीं मिलती और जिसके मन में शान्ति न हो, उसे सुख कहां से प्राप्त होगा, अत: सुख प्राप्त करने के लिए मन पर नियन्त्रण होना बहुत आवश्यक है।*
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*🚩🐅आपका दिन मंगलमय हो🐅🚩*
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